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पंचक्रोशी यात्रा उज्जैन प्रारम्भ , ११८ किमी की यात्रा , ७ पड़ाव , ५ लाख यात्री

पंचक्रोशी यात्रा

यात्रा का इतिहास एवं महत्व

पंचक्रोशी यात्रा में शिव के पूजन, अभिषेक, उपवास, दान एवं दर्शन की प्रधानता है। स्कंद पुराण के अनुसार अवंतिका के लिए वैशाख मास अत्यंत पुनीत है। इसी वैशाख मास के मेषस्थ सूर्य में वैशाख कृष्ण दशमी से अमावस्या तक इस पुनीत यात्रा का विधान है। उज्जैन का आकार चौकोर है। क्षेत्र के रक्षक देवता श्री महाकालेश्वर का स्थान मध्य बिंदु में है।

इस बिंदु के अलग-अलग अंतर से मंदिर स्थित है, जो द्वारपाल कहलाते हैं। इनमें पूर्व में पिंग्लेश्वर, दक्षिण में कायावरोहणेश्वर, पश्चिम में बिल्वकेश्वर तथा उत्तर में दुर्दरेश्वर महादेव के मंदिर स्थापित है, जो 84 महादेव मंदिर श्रंखला के अंतिम चार मंदिर है। इनकी कथा, पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है। पंचक्रोशी यात्रा के मूल में भी इसी विधान की भावना है।

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उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व के दौरान एक मई से पंचक्रोशी यात्रा प्रारंभ हो रही है। यात्रा श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। यात्रा का समापन 6 मई को होगा। इस वर्ष पंचक्रोशी यात्रा में पाँच लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है।

सिंहस्थ के दौरान होने वाली इस यात्रा का विशेष महत्व है। यात्रा मार्ग 118 किमी है, जिस पर सात पड़ाव हैं। मान्यता के अनुसार तीर्थयात्री श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर, पटनीबाजार उज्जैन से पूजा कर बल एवं शक्ति प्राप्त कर 118 किमी लंबी इस धर्म यात्रा के लिए पैदल रवाना होंगे। यात्रा के बाद 6 मई को वापस लौटने पर फिर से दर्शन के लिए इसी नागचंद्रेश्वर मंदिर आएंगे।

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पंचक्रोशी यात्रा का औपचारिक शुभारंभ वैशाख कृष्ण दशमी को 1 मई से होना है। परन्तु लाखों श्रद्धालु इस यात्रा के लिए सिर पर पोटली लिए शुक्रवार को ही उज्जैन पहुँच गए हैं। एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने शुक्रवार से ही यात्रा प्रारंभ कर दी है।

शनिवार को उज्जैन से यात्रा के पहले पड़ाव पिंगलेश्वर तक के 12 किमी लंबे मार्ग पर श्रद्धालुओं का दिनभर ताँता लगा रहा और श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पिंगलेश्वर पहुँच गए। यात्रा मार्ग पर प्रशासन द्वारा पेयजल एवं अन्य व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई है। वहीं पड़ाव स्थलों पर भी सभी इंतजाम किए गए हैं। यात्रा नागचंद्रेश्वर से प्रारंभ होकर पिंगलेश्वर पड़ाव, कायावरोहणेश्वर पड़ाव, नलवा उप पड़ाव, बिल्वकेश्वर पड़ाव अंबोदिया, कालियादेह उप पड़ाव, दुर्दरेश्वर पड़ाव जैथल एवं उंडासा होते हुए क्षिप्रा घाट रेती मैदान पर पहुँचकर 6 मई को समाप्त होगी। यात्रा के दौरान जय महाकाल के उदघोष एवं धार्मिक भजनों से वातावरण धर्ममय हो गया। पंचक्रोशी यात्रा के प्रति आस्था का ऐसा जन-सैलाब पहले कभी देखने को नहीं मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो रहे हैं।

पंचक्रोशी यात्रा के यात्रियों की सुविधा के लिए स्नानागार, शौचालय, दुग्ध पार्लर, राशन दुकान, शावर, पानी की टंकी, रहवासी क्षेत्र एवं पार्किंग क्षेत्र विकसित किया गया है। टेंट, बिछायत, स्थाई एवं अस्थाई शौचालय की व्यवस्था भी की गई है। इसके अलावा प्रत्येक पड़ाव, उप पड़ाव स्थल एवं पंचक्रोशी मार्ग पर प्रत्येक एक से डेढ़ किमी पर ठंडे पेयजल की प्याऊ स्थापित की गई है। पड़ाव, उप पड़ाव एवं विश्रांति स्थलों पर स्थानीय पंचक्रोशी सेवा समिति का गठन किया गया है, जो स्थानीय व्यवस्थाओं में समन्वय का कार्य करेगी।

 

 

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